वाक्य किसे कहते हैं। परिभाषा, भेद एवं उदाहरण

Vakya Kise Kahate Hain in Hindi Grammar

परिभाषा – भावों और विचारों को व्यवस्थित रूप से अभिव्यक्त करने वाले शब्द-समूह को “वाक्य” कहते हैं।

  • व्याकरण की दृष्टि से वाक्य सार्थक शब्दों का समूह होता है। वाक्य में इन शब्दों की क्रमबद्धता निश्चित होती है। इसके अभाव में वाक्य अपना अर्थ स्पष्ट रूप से प्रकट नहीं कर पाते।

उदाहरण – कृष्ण ने धर्म की स्थापना की। यह शब्द-समूह सार्थक है; व्याकरण के नियमों के अनुसार व्यवस्थित है तथा पूरा आशय प्रकट कर रहा है। अतः यह एक वाक्य है।

  • वाक्य के घटक – जिन अवयवों को मिलाकर वाक्य की रचना होती है, उन्हें वाक्य के अंग या घटक कहते हैं। वाक्य के मूल एवं अनिवार्य घटक हैं – कर्ता एवं क्रिया। उदाहरणतया सबसे संक्षिप्त वाक्य इस प्रकार का हो सकता है।

अपूर्वा मिली। गरिमा गाएगी। तू जा। आप खेले।

  • उपर्युक्त सभी वाक्यों में एक कर्ता (अपूर्वा, गरिमा, तू, आप) है तथा मिली, गाएगी, जा, खेलें आदि क्रिया है, इनकी सहायता से वाक्य-रचना सम्भव है। इनके अतिरिक्त वाक्य के अन्य घटक भी होते हैं।
  • जैसे – विशेषण, क्रिया-विशेषण, कारक आदि। ये घटक आवश्यकतानुसार आते हैं। इन्हें ऐच्छिक घटक कहा जाता है।
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वाक्य के भेद – Vakya Ke Kitne Bhed Hote Hain

वाक्य के भेदों के तीन आधार होते हैं –

A . अर्थ के आधार पर

B . रचना के आधार पर

C . क्रिया के आधार पर

Arth Ke Aadhar Par Vakya Ke Kitne Bhed Hote Hain

A . अर्थ के आधार पर वाक्य के भेद : –

अर्थ के आधार पर वाक्य के 8 भेद होते हैं –

1 . विधानवाचक वाक्य (Imperative Sentence) – जिन वाक्यों में किसी क्रिया के करने या होने की सामान्य सूचना मिलती है, उन्हें विधानवाचक वाक्य कहते हैं।

किसी के अस्तित्व का बोध भी इस प्रकार के वाक्यों से होता है,

जैसे –

सूर्य पूर्व में उदय होता है।

मैं कल जयपुर गया था।

2 . निषेधवाचक वाक्य (Negative Sentence) – जिन वाक्यों से किसी कार्य के निषेध (न होने) का बोध होता हो, उन्हें निषेधवाचक वाक्य कहते हैं। इन्हें नकारात्मक वाक्य भी कहते हैं,

जैसे –

बसंती नहीं नाचेगी।

सारिका नहीं आयी।

आप बजार ना जायें।

3 . प्रश्नवाचक वाक्य (Interrogative Sentence) – जिन वाक्यों में प्रश्न किया जाए अर्थात् किसी से कोई बात पूछी जाए, उन्हें प्रश्नवाचक वाक्य कहते हैं,

जैसे –

क्या बसंती नहीं नाचेगी?

तुम कब आओगे?

क्या आप खाना खाओगे?

4 . विस्मयादिवाचक वाक्य (Interjective Sentence) – जिन वाक्यों से आश्चर्य (विस्मय), हर्ष, शोक, घृणा आदि के भाव व्यक्त हों, उन्हें विस्मयादिवाचक वाक्य कहते हैं।

जैसे –

क्या बसंती नाची!

ओह! बैंग बैंग फिल्म फ्लॉप हो गई!

पापा, यह हो नहीं सकता!

5 . आज्ञावाचक वाक्य (Order denoting Sentence) – जिन वाक्यों से आज्ञा या अनुमति देने का बोध हो, उन्हें आज्ञावाचक वाक्य कहते हैं,

जैसे – बसंती, आप चुप रहिए।

6 . इच्छावाचक वाक्य (Desirative Sentence) – वक्ता की इच्छा, या आशीर्वाद को व्यक्त करने वाले इच्छावाचक वाक्य कहलाते हैं,

जैसे –

ईश्वर तुम्हें सफलता प्रदान करे।

ईश्वर बसंती को चिरायु करे।

आपका जीवन मंगलमय हो।

7 . संदेहवाचक वाक्य (Doubtful Sentence) – जिन वाक्यों में कार्य के होने में संदेह अथवा सम्भावना का बोध हो, उन्हें संदेहवाचक वाक्य कहते हैं,

जैसे –

शायद मैं फिल्म देखने चला जाऊँ।

8 . संकेतवाचक वाक्य (Indicative Sentence) – जिन वाक्यों से एक क्रिया का दूसरी क्रिया पर निर्भर होने का बोध हो, उन्हें संकेतवाचक वाक्य कहते हैं। इन्हें हेतुवाचक वाक्य भी कहते हैं। इनसे कारण शर्त आदि का बोध होता है,

जैसे –

फिल्म में अक्षय कुमार होता, तो फिल्म हिट हो जाती।

Rachna Ke Aadhar Par Vakya Ke Kitne Bhed Hote Hain

B . रचना के आधार पर वाक्य के भेद : –

रचना के आधार वाक्य के 3 भेद होते हैं –

(1) साधारण वाक्य

(2) संयुक्त वाक्य

(3) मिश्र वाक्य।

1 . साधारण वाक्य (Simple Sentence) – जिस वाक्य में एक उद्देश्य व एक ही विधेय होता है। उसे साधारण सरल वाक्य कहते हैं। अर्थात् एक कर्ता व एक ही क्रिया होती है।

जैसे –

मैं जाता हूँ।

  • उदाहरण – राधा पढ़ती है।

इस वाक्य में ‘राधा’ उद्देश्य और ‘पढ़ती है’ विधेय है।

विविध उदाहरण –

दया से बढ़कर कोई भाव नहीं है।

सीमा धीरे-धीरे लिखती है।

हवा का तीव्र झोंका सब कुछ उड़ा ले गया।

वह हँसते-हँसते रोने लगी।

उसने आज सुबह दूध पिया।

दुष्ट व्यक्ति की मित्रता स्थायी नहीं रहती है।

समय पर पश्चात्ताप करना ही बुद्धिमानी की बात है।

सन्तोष से बढ़कर कोई सुख नहीं है।

ओम प्रकाश पुस्तक पढ़ता है।

सलमा घर जाती है।

विद्वान मनुष्य का सभी सम्मान करते हैं।

मैं प्रतिदिन दो घण्टे अध्ययन करता हूँ।

दूसरों का शोषण करने वाले अनेक व्यक्ति संसार में होते हैं।

आज बरसात होगी।

वाणी की मृदुता सब को वश में कर लेती है।

राम और सीता जाते हैं।

2 . संयुक्त वाक्य (Compound Sentence) – ऐसे वाक्य जिसके दो या दो से अधिक सभी उपवाक्य समान स्तर के हों तथा आपस में तथा, एवं, या, अथवा, और, परन्तु, किन्तु, लेकिन, बल्कि, अतः आदि समुच्चयबोधक शब्दों से जुड़े हों, उन्हें संयुक्त वाक्य कहते हैं।

जैसे –

हमने बाजार की खाक छानी, किन्तु काम नहीं बना।

इधर अध्यापिका पहुंची और उधर छात्राएँ एक-एक करके खिसकने लगी।

विविध उदाहरण –

वह तुम्हारा साथ दे या न दे, मैं दूंगा।

पैसा कमाना एक बात है, उसे ठीक से खर्च करना दूसरी बात है।

मैं रोटी खाकर लेटा ही था कि पेट में दर्द होने लगा और दर्द इतना बढ़ा कि तुरन्त डॉक्टर को बुलाना पड़ा।

वह साधु है परन्तु किसी से भिक्षा स्वीकार नहीं करता।

मैं पढ़ता हूँ और वह गाता है।

‘राम आया, भाई से मिला और तुरन्त लौट गया।

उसकी टाँग में दर्द है, इसलिए वह कार्यालय नहीं आया।

कोई नेता आ रहा है अथवा कोई मंत्री आ रहा है।

ऊपर लिखे उदाहरणों में ‘किन्तु’, ‘और’ शब्द से वाक्य जुड़े हुए हैं। यदि इन योजक अव्यय शब्दों को हटा दिया जाएँ, तो प्रत्येक में दो-दो स्वतंत्र वाक्य बनते हैं । योजकों की सहायता से जुड़े हुए होने के कारण इन्हें संयुक्त वाक्य कहते हैं।

3 . मिश्र वाक्य (Complex Sentence) – जिन वाक्यों की रचना एक से अधिक ऐसे उपवाक्यों से हुई हो, जिनमें एक प्रधान तथा अन्य वाक्य गौण हो, उन्हें मिश्र वाक्य कहते हैं।

  • नोट – मिश्र वाक्य प्रायः ‘कि’, ‘क्योंकि’ अथवा दो संयोजक शब्दों (जब-तब, जैसा-वैसा, यदि-तो, जिसकी-उसकी, जैसा-वैसा, जितना-उतना, जो-सो/वह, यद्यपि-तथापि आदि) से जुड़ा रहता है।

Kriya Ke Aadhar Par Vakya Ke Kitne Bhed Hote Hain

C . क्रिया के आधार पर वाक्य के भेद : –

क्रिया के आधार पर वाक्य के 3 भेद होते हैं –

(i) कर्तृवाच्य – जहाँ क्रिया कर्ता के अनुरूप हो इसमें सकर्मक और अकर्मक दोनों का प्रयोग होता है।

जैसे –

राम पुस्तक पढ़ता है।

पिताजी प्रतिदिन पार्क में टहलते हैं।

(ii) कर्मवाच्य – जहाँ क्रिया कर्म के अनुरूप हो। इसमें केवल सकर्मक क्रिया का प्रयोग होता है।

जैसे –

राम के द्वारा पुस्तक पढ़ी जाती है।

राधा के द्वारा लेख लिखा गया।

(iii) भाववाच्य – जहाँ क्रिया न तो कर्ता के अनुरूप होती है और न ही कर्म के अनुरूप होती है बल्कि क्रिया सदैव पुल्लिंग, एकवचन में होती है।

जैसे –

बच्चों से सोया जाता है।

मुझसे अब नहीं चला जाता।

हिंदी व्याकरण – Hindi Grammar