पदबंध : परिभाषा, भेद और उदाहरण – Padbandh in Hindi

पदबंध किसे कहते हैं। – Padbandh in Hindi Grammar

 

परिभाषा – वाक्य में जब एक से अधिक पद मिलकर एक व्याकरणिक इकाई का काम करते हैं तब उस बंधी हुई इकाई को पदबंध कहते हैं।

 

दूसरे शब्दों में कहा जा सकता है कि वाक्य का वह सार्थक अंश, जिसमें समापिका क्रिया न हो, पदबंध कहलाता है। पदबंध को वाक्यांश भी कहा जाता है। वाक्य में प्रयुक्त शब्द को पद कहते हैं।

 

जैसे –

 

1 . पाँचवी कक्षा में पढ़ने वाला छात्र सुरेश बहुत बुद्धिमान है।

2 . हिंदी पढ़ाने वाले गुरुजी ने मुझे एक अति सुंदर और उपयोगी पुस्तक दी।

3 . किसी व्यक्ति या समाज का उत्थान अनुशासन पर निर्भर है।

 

ऊपर दिए गए वाक्यों में हरे रंग का अंश पदबंध है।

 

— उपर्युक्त परिभाषा से पदबंध के निम्नलिखित विशेषताएँ परिलक्षित होती हैं –

 

(क.) इसमें पदों का संबंध इस प्रकार होता है कि वह एक इकाई बन जाता है।

(ख.) पदबंध में एक से अधिक पद होते हैं।

(ग.) पदबंध के शब्द-क्रम निश्चित होते हैं।

(घ.) पदबंध सदा किसी वाक्य का अंश होता है।

(च.) एक शब्द के अनेक शब्द प्रायः पदबंध होते हैं।

(छ.) मुहावरे प्रायः पदबंध होते हैं, लेकिन सभी पदबंध मुहावरे नहीं होते।

(ज.) समस्त पदों के विग्रह प्रायः पदबंध हो जाते हैं।

 

पदबंध के भेद या प्रकार – Padbandh Ke Bhed Ya Prakar in Hindi

 

पदबंध में विकारी और अविकारी दोनों प्रकार के शब्द हो सकते हैं और वे मिलकर व्याकरणिक इकाई पद का कार्य करते हैं। पदबंध के आठ भेद होते हैं जो की निम्नलिखित हैं –

 

1 . संज्ञा पदबंध

2 . सर्वनाम पदबंध

3 . क्रिया पदबंध

4 . विशेषण पदबंध

5 . क्रिया विशेषण पदबंध

6 . संबंधबोधक पदबंध

7 . समुच्चयबोधक पदबंध

8 . विस्मयादि बोधक पदबंध।

 

1 . संज्ञा पदबंध 

 

परिभाषा – जब कोई पद समूह वाक्य में संज्ञा का काम देता है तो उसे संज्ञा पदबंध कहते हैं। संज्ञा पदबंध में शीर्ष में संज्ञा पद होता है। अन्य सभी पद उस पर आश्रित हैं।

 

जैसे –

 

(क.) पास के मकान में रहने वाली औरत मेरी परिचित है।

(ख.) यह पेड़ तो किसी बड़े और तेज धार वाले कुल्हाड़ी से ही कट सकता है।

(ग.) लंका का राजा रावण बहुत विद्वान था।

 

अतः ऊपर दिए गए वाक्यों में हरे रंग का अंश संज्ञा पदबंध है।

 

— इसकी प्रमुख रचना रीतियाँ है।

 

(क.) विशेषण – (गुणवाची विशेषण) सभ्य पुरुष; सुंदर फूल; (संख्यावाची) तीन मकान, चार घोड़े; (परिमाणवाची) दो किलो आटा, एक लीटर दूध; (सर्वनामिक) यह किताबें, कोई महिला; बहता हुआ पानी, थका हुआ मजदूर; (संबंधवाची) मोहन की किताब, मेरा घर, अपना बस्ता; (कर्तृत्ववाची) दौड़ में भाग लेने वाले खिलाड़ी, बेंगलुरु जाने वाली गाड़ी (तुलनावाची विशेषण) युद्धिष्ठर-सा सत्यवादी।

 

(ख.) उपाधिसूचक – नाम के पहले श्री, श्रीमान आदि, नाम के बाद जी महाराज आदि।

 

(ग.) समानाधिकरण सूचक – दशरथ पुत्र राम, गंगा नदी आदि।

 

2 . सर्वनाम पदबंध

 

परिभाषा – वाक्य में सर्वनाम का कार्य करने वाले पदबंध को सर्वनाम पदबंध कहते हैं।

 

जैसे –

 

(क.) भाग्य का मारा मैं कहाँ आ पहुँचा।

(ख.) चोट खाए हुए तुम भला क्या खेलोगे।

(ग.) है यहाँ ऐसा कोई! जो अजगर को पकड़ ले।

(घ.) शेर की तरह दहाड़ने वाले आप भीगी बिल्ली कैसे बन गए?

 

ऊपर दिए गए वाक्यों में हरे रंग का अंश सर्वनाम पदबंध है।

 

3 . क्रिया पदबंध 

 

परिभाषा – एक से अधिक क्रिया पदों से बनने वाले क्रिया रूपों को क्रिया पदबंध कहते हैं।

 

जैसे –

 

(क.) पूछा जा सकता है।

(ख.) आता रहता था।

(ग.) बहता जा रहा है।

(घ.) वापस आकर कहने लगा।

 

— क्रिया पदबंध के शीर्ष में क्रिया होती है। अन्य पद क्रिया पर आश्रित होते हैं। इसके दो प्रमुख भेद है –

 

(क.) क्रिया विशेषणात्मक क्रिया पदबंध – यहाँ क्रिया पर क्रियाविशेषणात्मक पद या पदबंध आश्रित होता है। जैसे – धीरे-धीरे चल रहा है, तेजी से दौड़ रहा है। सुबह-सुबह खेलता है। मैदान में दौड़ रहा है।

 

(ख.) अंत-केंद्रित क्रिया पदबंध – यहाँ भी मुख्य क्रिया पर अन्य सहायक, संयोजी और रंजक क्रियाएँ आश्रित होती है। जैसे – मोहन किताब पढ़ रहा है, में क्रिया पदबंध पढ़ रहा है। इस क्रियापदबंध का शीर्ष शब्द पढ़ है।

 

— अतः केंद्रित क्रिया पदबंध में समापिका क्रिया के साथ नकारात्मक या अवधारणात्मक निपात भी आ सकते हैं। जैसे – गिर ही पड़ा, गिर न जाए, पढ़ाई ही नहीं जाता।

 

4 . विशेषण पदबंध 

 

परिभाषा – जब कोई पद समूह किसी संज्ञा, सर्वनाम की विशेषता बताए तो उसे विशेषण पदबंध कहते हैं।

 

जैसे –

 

(क.) शेर के सामने बलवान (आदमी)।

(ख.) जोर-जोर से रोने वाले (तुम)।

(ग.) सुंदर और स्वच्छ लेख लिखने वाला (छात्र)।

 

— विशेषण पदबंध के शीर्ष में विशेषण होता है, अन्य पद उस पर (विशेषण पर) आश्रित होते हैं। इसमें प्रमुखतया प्रविशेषण लगता है –

 

(क.) प्रविशेषण – बहुत सुंदर, थोड़ा नमकीन, ज्यादा कड़वा; कुछ मीठा-मीठा, जरा खट्टा-खट्टा; लगभग हजार, कोई एक लाख, ठीक दस।

 

(ख.) तुलनात्मक/सादृश्यात्मक – सिंह जैसा बलवान व्यक्ति। हीरे से भी अधिक कठोर।

 

5 . क्रिया विशेषण पदबंध 

 

परिभाषा – वह वाक्यांश या पद समूह जो क्रिया-विशेषण का कार्य करें उसे क्रिया-विशेषण पदबंध कहते हैं।

 

जैसे –

 

(क.) दुकान से लौटकर जाऊँगा

(ख.) पहले से बहुत धीरे चलने लगा

(ग.) पैरों में लौटते हुए बोला

(घ.) मोहन घर से लौटकर कहने लगा उसका मन नहीं लग रहा है।

 

— क्रिया विशेषण पदबंध में क्रियाविशेषण शीर्ष स्थान पर होता है और अन्य पद उस पर आश्रित होता है। जैसे – बहुत धीरे-धीरे उठा, में बहुत धीरे-धीरे क्रिया विशेषण पदबंध है। यहाँ धीरे-धीरे क्रिया विशेषण है और बहुत उसका प्रविशेषण।

 

6 . संबंधबोधक पदबंध

 

परिभाषा – जो शब्द वाक्य में दो पदबंधों के बीच संबंध स्थापित करावें, उन शब्दों को सम्बन्ध बोधक पदबंध कहेंगे।

 

जैसे – बदले, पलटे, समान, योग्य, सरीखा, ऊपर, भीतर, पीछे से, बाहर की ओर आदि।

 

‘शब्द’ वाक्य में संबंध बोधक पदबंध कहे जाते हैं।

 

(क.) सुरेश की ओर

(ख.) बस के ऊपर

(ग.) मोहन के सामान आदि।

 

7 . समुच्चयबोधक पदबंध 

 

परिभाषा – जो ‘शब्द, वाक्यांश’ एक पदबंध को दूसरे वाक्य/वाक्यांश से मिलाते हैं उन्हें समुच्चय बोधक पदबंध कहेंगे।

 

जैसे –

 

(क.) राम और श्याम विद्यालय जाते हैं।

(ख.) तुम आओगे अथवा श्याम आएगा।

 

8 . विस्मयादि बोधक पदबंध

 

किसी वाक्य में हर्ष, शोक, विस्मय, लज्जा, ग्लानि आदि मनोभावों को व्यक्त करने वाले शब्द विस्मयादिबोधक पदबंध कहलाते हैं।

 

जैसे –

 

(क.) अहा! आज तो जलेबियाँ बन रही है।

(ख.) हाँ! मैं तो सही कहता हूँ।

(ग.) अरे! तुम फर्स्ट आ गए।

 

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