क्रिया विशेषण किसे कहते हैं। परिभाषा, भेद और उदाहरण

क्रिया विशेषण (Kriya Visheshan in Hindi Grammar)

 

परिभाषा – जिस शब्द से क्रिया की विशेषता प्रकट हो, उसे क्रिया विशेषण कहते हैं।

 

जैसे –

 

वह धीरे-धीरे जाता है।

वह धीरे-धीरे गाता है।

 

यहां ‘जाता है और गाता है’ क्रिया हैं। जाने और गाने का काम धीरे-धीरे हो रहा है। अतः धीरे-धीरे क्रिया विशेषण है।

 

क्रिया विशेषण के भेद (Kriya Visheshan Ke Bhed in Hindi Grammar)

 

हिंदी व्याकरण में क्रिया विशेषण के पांच भेद होते हैं जो की नीचे लिखें गए हैं –

 

1 . स्थानवाचक – यहाँ, वहाँ, जहाँ, कहाँ, आगे, पीछे

2 . कालवाचक – आज, कल, परसो, अब, जब, कब, तब, अभी

3 . रीतिवाचक – ऐसे, वैसे, कैसे, अचानक, धीरे, अवश्य, सचमुच, सच, इसीलिए आदि।

4 . परिमाणवाचक – बहुत, बड़ा, भारी, बिल्कुल, खूब

5 . प्रश्नवाचक – क्यों, क्या, किसलिए, किस कारण

 

क्रियाविशेषणों का प्रयोग

 

कुछ क्रिया विशेषण ऐसे होते हैं, जिनके विशेष अर्थ होते हैं। वाक्यों में इनके प्रयोग से ही विशेष अर्थ का बोध होता है। दैनिक जीवन में इनका प्रयोग होता रहता है लेकिन इनके अर्थ की सही जानकारी ना रहने के कारण इन क्रियाविशेषणों का गलत प्रयोग हो जाता है।

 

यहां हम कुछ युग्म-क्रियाविशेषणों के उदाहरण दे रहे हैं, जो साधारण तौर पर एकार्थक प्रतीत होते हैं –

 

तब, फिर – यह कालवाचक क्रिया विशेषण है, जिनका प्रयोग तीनों कालों में होता है किंतु तब का प्रयोग वहाँ होता है, जहां कोई बात तुरंत हुई हो और फिर प्रयोग वहाँ होता है, जहां कुछ समय बीत जाने का बोध होता है।

 

जैसे – तब उसने मुझे देखा। जब वह आया, तब वह गया। जब गाड़ी छूट गई, तब आप आये।

 

फिर – फिर वह कहने लगा। फिर आप बोलने लगे?

 

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अब, अभी – दोनों कालवाचक क्रिया विशेषण है। किंतु दोनों के विशेष अर्थ में अंतर है जब अनिश्चित समय का और अभी निश्चित समय का बोधक है।

 

जैसे –

 

अब – अब वह घर नहीं जाएगा। अब एक विचित्र बात हुई। अब जा रहा हूँ।

 

अभी – अभी पाँच बजे हैं। अभी जा रहा हूँ। अभी परसों की बात है।

 

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न, नहीं, मत – तीनों निषेधवाचक क्रिया विशेषण है। किंतु तीनों के अलग-अलग प्रयोग है।

 

जैसे –

 

न – जहाँ हल्का निषेध, हो वहाँ न का प्रयोग होता है।

 

जैसे – तुम ना जाओगे, तो वह भी न जाएगा। इधर न आना।

 

नहीं – जहाँ निषेध निश्चित हो, वहाँ नहीं का प्रयोग होता है।

 

जैसे – वह नहीं जाएगा। उसने नहीं सुना।

 

मत – इसका प्रयोग निषेधात्मक आज्ञा के लिए होता हैं।

 

जैसे – भीतर मत आओ। वहां मत बैठो। यह काम मत करो।

 

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भी, ही – दोनों का प्रयोग किसी बात पर बल देने के लिए होता है।

 

ही – इस काम को तुम ही कर सकते हो। (एकमात्र तुम कर सकते हो।)

भी – इस काम को तुम भी कर सकते हो। (और लोगों की अतिरिक्त)

 

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प्रायः, बहुधा – दोनों का अर्थ ‘अधिकतर’ है किंतु प्रायः की अपेक्षा बहुधा की मात्रा अधिक होती है।

 

जैसे –

 

प्रायः – बच्चे प्रायः झूठ नहीं बोलते।

बहुधा – बच्चे बहुधा हठी होते हैं।

 

धन्यवाद

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